Delhi High Court · 2025-01-20
M/S MN AUTOMOBILE PRIVATE LIMITED vs GURIQBAL SINGH & ANR.
- Citation / case number
- FAO (COMM)-20/2025 2025:DHC:281-DB
- Court
- Delhi High Court
- Petitioner
- M/S MN AUTOMOBILE PRIVATE LIMITED
- Respondent
- GURIQBAL SINGH & ANR.
Judgment text excerpt
2025:DHC:281-DB द ल उ च यायालय : नई द ल नणय क त थ: 20.01.2025 आ. .अ. (वा ण.) 20/2025 FAO(COMM) 20/2025 मेसस एम. एन. ऑटोमोबाइल ाइवेट ल मटे ड ......अपीलाथ वारा: ी सुद प कुमार ो य, अ धव ता बनाम गु र बाल संह व अ य ....... यथ गण वारा: कोई नह ं कोरमः माननीय यायमू त ी नवीन चावला माननीय यायमू त सु ी शा लंदर कौर या. नवीन चावला, (मौ खक) स. व.आ. 3489/2025 (छूट) 1. सभी तकसंगत अपवाद के अधीन वीकृत। आ. .अ. (वा ण.) 20/2025 व स. व.आ. 3488/2025 आ. .अ.(वा ण) 20/2025 पृ ठ सं. 1 2025:DHC:281-DB 2. यह अपील अपीलकता वारा दायर क गई है , िजसम स.वा. (वा ण) सं. 317/2022 म व वान िजला यायाधीश (वा णि यक यायालय)-05 तीस हजार यायालय, पि चम द ल (इसके बाद व वान " वचारण यायालय" के प म संद भत) वारा पा रत दनांक 19.11.2024 के आदे श को चुनौती द गई है । शीषक गु र बाल संह व अ य बनाम एम. एन. ऑटोमोबाइल ाइवेट ल मटे ड व अ य स वल या सं हता, 1908 (सं ेप म, "सीपीसी") के आदे श XXXIX नयम 10 के तहत यथ गण वारा दायर आवेदन को वीकार करने और अपीलकता को उ त आदे श क त थ से चार स ताह क अव ध के भीतर कराए का स पूण बकाया जमा करने का नदश दे ना। 3. एक सं त प ृ ठभू म के प म, यह अपीलकता का एक वीकृत मामला है क वषय प रसर, यानी, संप सं या 88/2, लॉक-बी, रे वाड़ी लाइन औ यो गक े , मायापुर फेज-I, नई द ल -110064 िजसका े फल 394.8 वग गज है को यथ गण वारा दो कंप नय , मेसस स का कास लोबल ाइवेट ल मटे ड और मेसस स का ऑटोमोबाइल ाइवेट ल मटे ड प म दनांक 10.12.2014 के दो प टा वलेख के मा यम से प टे पर दया गया था। मेसस स का कास लोबल ाइवेट ल मटे ड और मेसस स का ऑटोमोबाइल ाइवेट ल मटे ड एक ह बंधन के तहत समह ू कंप नयाँ थीं। आ. .अ.(वा ण) 20/2025 पृ ठ सं. 2 2025:DHC:281-DB 4. इसके बाद, मेसस स का ऑटोमोबाइल ाइवेट ल मटे ड क शेयरधा रता और नदे शक म बदलाव कया गया और कंपनी का नाम भी बदलकर वतमान अपीलकता कर दया गया। 5. मेसस स का ऑटोमोबाइल ाइवेट ल मटे ड साथ प टा वलेख म एक सं वदा थी क दोन प टा वलेख आपस म जुड़े हुए थे और कसी भी प टा वलेख को अकेले समा त नह ं कया जा सकता था, यानी य