Delhi High Court · 2025-02-25
RAJENDRA SACHDEVA vs M/S A.C. ENGINEERING PRIVATE LIMITED AND ORS.
- Citation / case number
- RFA-633/2023 2025:DHC:1221
- Court
- Delhi High Court
- Petitioner
- RAJENDRA SACHDEVA
- Respondent
- M/S A.C. ENGINEERING PRIVATE LIMITED AND ORS.
Judgment text excerpt
2025:DHC:1221 द ल उ च यायालय : नई द ल नणय सुर त: 19.02.2025 नणय सुनाया गया: 25.02.2025 न. .अ. 633/2023 RFA 633/2023 राज सचदे वा ......अपीलाथ वारा: ी नशांत नैन और ी वशाल कुमार, अ धव तागण बनाम मेसस ए.सी. इंजी नय रंग ाइवेट ल मटे ड और अ य .... यथ गण वारा: ी एच.के. शेखर, 2 से 4 के लए अ धव ता कोरम: यायमू त ी गर श कठपा लया नणय या. गर श कठपा लया: 1. यह अपील िजसके मा यम से अपीलाथ वारा नणय और ड दनां कत 22.05.2023 को चन ु ौती द गई है, स वल या सं हता क धारा 96 के अंतगत दायर क गई है , िजसम अपीलाथ वारा दायर धन वसूल के वाद म केवल वतमान यथ सं या 1 कंपनी के व ध वाद रा श क न. .आ. 633/2023 पृ ठ सं. 1 2025:DHC:1221 आं शक प से ड क गई और शेष यथ गण, जो यथ सं या 1 कंपनी के नदे शक ह, के व ध वाद खा रज कर दया गया था। यथ सं या 1 कंपनी को भेजा गया नो टस सह पते के अभाव म अ े षत लौट आया, कंतु अपीलाथ ने आगे यास न करने का वक प चुना, य क यथ सं या 1 कंपनी के व ध वाद पहले ह ड हो चक ु ा था और वतमान अपील केवल शेष तवाद गण के व ध है। नो टस क तामील होने पर, यथ गण सं या 2 से 4 ने अ धव ता के मा यम से उपि थ त दज क है । उनके अनुरोध पर, मने दोन प कारगण के अ धव तागण वारा तुत अं तम तक को सन ु ा और अपील के साथ दायर कए गए वचारण यायालय के अ भलेख का भी पर ण कया है । 2. सं ेप म कह तो, इस अपील से संबं धत आव यक प रि थ तयाँ नीचे उि ल खत क जाती ह। 2.1 वतमान अपीलाथ ने यथ सं या 1 कंपनी तथा उसके नदे शक , यथ गण सं या 2 से 4, के व ध ₹11,00,000/- क वसूल हे तु वाद, िजसम अ भवाक न न ल खत ह, दायर कया है । यथ गण सं या 2 से 4, जो यथ सं या 1 के नदे शक ह, यथ सं या 1 के दै नक यापा रक काय का पयवे ण, नयं ण एवं दे खरे ख कर रहे ह। यथ गण सं या 2 और 3 के साथ उसक मै ीपूण संबंध होने के कारण, अ ैल 2015 के थम स ताह म उ ह ने उससे अनुरोध कया क वह यथ गण सं या 1 कंपनी के नाम पर न. .आ. 633/2023 पृ ठ सं. 2 2025:DHC:1221 ₹11,00,000/- का मै ी ऋण ( डल लोन (Friendly Loan) दान करे , िजसक यावसा यक ि थ त व ीय संकट से गुजर रह थी, और उ ह ने यह आ वासन दया क उ त ऋण क